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आज विश्व रेडियो दिवस (World Radio Day 2022 in Hindi) है। हर साल 13 फरवरी को दुनियाभर में विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इस दिन हर साल यूनेस्को विश्व के सभी ब्राॅकास्टर्स, संगठनों और समुदायों के साथ मिलकर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करता है। संचार के माध्यम के तौर पर रेडियो की भूमिका पर चर्चा होती है और लोगों को इस बाबत जागरूक किया जाता है। रेडियो एक ऐसी सेवा है जो दुनियाभर में सूचना का आदान-प्रदान करता है। आपदा या आपात कालीन स्थिति में रेडियो का महत्व बढ़ जाता है।
ऐसे में विश्व रेडियो दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर के युवाओं को रेडियो की आवश्यकता और महत्व के प्रति जागरूक करना है। सूचना फैलाने के लिए सबसे शक्तिशाली और सस्ते माध्यम के तौर पर रेडियो को जाना जाता है। भले ही रेडियो सदियों पुराना माध्यम हो लेकिन संचार के लिए इसका इस्तेमाल आज भी हो रहा है।आइए जानते हैं कि विश्व रेडियो दिवस की शुरुआत कब और क्यों हुई? क्या है रेडियो दिवस 2022 की थीम।
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रेडियो की उत्पत्ति लैटिन शब्द ‘रेडियस’ से हुई है, जिसका मतलब यानि अर्थ ‘रे’ है. इस शब्द को 20वीं शताब्दी में अन्य वायरलेस तकनीक से रेडियो को अलग करने के लिए उपयोग में लाया गया.
विश्व रेडियो दिवस (World Radio Day 2022) की शुरुआत साल 2011 में की गई थी। साल 2010 में स्पेन रेडियो अकादमी ने 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाने के लिए पहली बार प्रस्ताव दिया था। साल 2011 में यूनेस्को के सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाने की घोषणा की। बाद में साल 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी इसे अपना लिया। फिर उसी साल 13 फरवरी को पहली बार यूनेस्को ने विश्व रेडियो दिवस मनाया।
विश्व रेडियो दिवस 2022 की थीम ‘एवोलूशन – द वर्ल्ड इज ऑलवेज चेंजिंग’ है। यानी विकास के साथ विश्व भी विकसित हो रहा है। यह थीम रेडियो के लचीलेपन और स्थिरता को प्रदर्शित कर रही है। इसका मतलब है कि दुनिया बदलती रहती है, इसलिए रेडियो में भी नवाचार हो रहा है।
📻 The advent of public wireless broadcasting in the 1920s enabled millions of people across the globe to hear their King’s voice for the first time in their own homes.
On #WorldRadioDay, we look back on some of those early broadcasts. pic.twitter.com/TWKNc6o15r
World Radio Day 2022: जिस समय दुनिया में रेडियो आया उस समय सूचना और मनोरंजन के कोई खास साधन नहीं थे. ऐसे में रेडियो ने एक क्रांति पैदा की और देखते ही देखते इसने दुनियाभर में अपने पांव पसार दिए. भारत में तो रेडियो का इतिहास और भी स्वर्णिम रहा है. रेडियो ने आम भारतीय को भी खास बनाने में अहम भूमिका निभाई है. आज से कई साल पहले जब टीवी का प्रचार अधिक नहीं था तब दूर दराज के क्षेत्रवासियों को मुख्य धारा की खबरें दे उन्हें एक धारा में चलाने का काम रेडियो ने ही किया था और कल ही क्यूं आज भी रेडियो देश और दुनिया के कई क्षेत्रों में सूचना और प्रसार का एकमात्र साधन है.
Read in English: World Radio Day: History, Theme, Invention, True Bhakti
रेडियो एक ऐसी सेवा है जिसके जरिए न केवल रेडियो फ्रीक्वेंसी से बात की जाती है, बल्कि आपदा के समय जब संचार के माध्यम ठप हो जाएं तो प्रभावितों की मदद भी की जा सकती है.
कभी बुजुर्गो और पुराने जमाने के लोगों की पसंद माने जाने वाला रेडियो अब युवा दिलों की धड़कन बन चुका है. सूचना और मनोरंजन के इस युग में एक बहुत बड़ा वर्ग रेडियो के साथ जुड़ चुका है. खासकर मोबाइल और इंटरनेट पर रेडियो को युवा बड़े चाव से सुनते हैं. विविध भारती का रेनबो चैनल और एफएम के प्रसारण आज भी जनता के बीच लोकप्रिय हैं. आज रेडियो पर व्यापक पैमाने पर बाजार का प्रभाव देखा जाता है. कई प्राइवेट रेडियो स्टेशन भी आज जनता के बीच बेहद चाव से चुने जाते हैं लेकिन ऐसे स्टेशन और चैनल मात्र मनोरंजन का ही साधन होते हैं. आकाशवाणी और विविध भारती के चैनलों को ही जनता सही पैमाने पर ज्ञान और सूचना का साधन मानती है.
विश्व रेडियो दिवस (World Radio Day 2022) मनाने का मुख्य उद्देश्य जनता और मीडिया के बीच रेडियो के महत्व को बढ़ाने के लिए जागरूकता फैलाना है. यह निर्णयकर्ताओं को रेडियो के माध्यम से सूचनाओं की स्थापना और जानकारी प्रदान करने, नेटवर्किंग बढ़ाने और प्रसारकों के बीच एक प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रदान करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है.
रेडियो किसी भी अन्य प्रकार के प्रसारण मीडिया की तुलना में हमारे साथ अधिक समय तक रहा है. इसका मतलब है कि अधिकांश अन्य तकनीकों की तुलना में अधिक लोगों के पास इसकी पहुंच है. हर साल विश्व रेडियो दिवस पर, क्षेत्र के विशेषज्ञ एक साथ जुड़ते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि अलग-अलग समुदायों तक कैसे पहुंचा जाए. विश्व रेडियो दिवस यह सुनिश्चित करता है कि हर कोई, चाहे वह कितना भी केंद्रीय या दूरस्थ क्यों न हो, सूचना तक पहुंच हो.
रेडियो तरंगें एक प्रकार की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन हैं जिसका उपयोग टेलीविज़न, मोबाइल फ़ोन और रेडियो जैसी संचार तकनीकों में किया जाता है. रेडियो तरंगों को इन उपकरणों द्वारा प्राप्त किया जाता है और उन्हें ध्वनि तरंगों को उत्पन्न करने के लिए स्पीकर में यांत्रिक कंपन में परिवर्तित किया जाता है. रेडियो-फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (EM) स्पेक्ट्रम का एक छोटा सा हिस्सा है.
आपको बता दें कि घटती तरंग दैर्ध्य, बढ़ती ऊर्जा और आवृत्ति के अनुसार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम को सात क्षेत्रों में विभाजित किया गया है. कुछ पदनाम रेडियो तरंगें, माइक्रोवेव, अवरक्त (infrared), दृश्य प्रकाश (visible light), पराबैंगनी (UV), एक्स-रे और गामा-किरणें हैं. EM स्पेक्ट्रम में, रेडियो तरंगों की सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य होती है.
रेडियो (World Radio Day 2022) की अपनी एक अलग महत्ता है और कई महान व्यक्ति भी इस पर अपना विचार स्पष्ट कर चुके हैं। जो कुछ इस प्रकार हैं-
जब रेडियो चुप रहता है, तो हमारे कान कभी भी वास्तविक विवरण नहीं सुनेंगे!” – अर्नेस्ट अग्यमंग येबोआह
“देश का रेडियो किसी भी अन्य समूह के लोगों की तुलना में एक परिवार की तरह है, जिनसे मैं मिला हूं।” – टेलर स्विफ्ट
“रेडियो माइक्रोफ़ोन के कारण शक्तिशाली नहीं है, बल्कि वह जो माइक्रोफ़ोन के पीछे बैठता है” – अर्नेस्ट अग्यमंग येबोह
कोरोना महामारी में लाखों लोगों की जिंदगियां चली गई. ऐसे में जब सब कुछ बंद था उस दौरान रेडियो ने लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया. माहामारी के बीच रेडियो के जरिए लोगों तक जरूरी जानकारियों को पंहुचाया गया. इतना ही नहीं इस समय जब ज्यादातर लोग घर में रहकर और वायरस से डरकर डिप्रेशन आ गए थे.
ऑल इंडिया रेडियो की कई भाषाओँ में सेवाएं थी, प्रत्येक देशभर में विभिन्न क्षेत्रों में सेवारत थी.